क्या शैतानी शक्तियां इंसानों का बस भ्रम हैं?

विशेषज्ञ बताते हैं कि लोग परेशानी के कारण इस तरह की हरकतें करते हैं. इसमें लोग जो बातें घर में नहीं कह पाते, वो भूत के बहाने कहते हैं

News18Hindi
Updated: August 19, 2018, 7:35 AM IST
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आखिर प्रेत बाधाओं का शिकार हर शख्स अजीब-ओ-गरीब हरकतें क्यों करता है? आखिर इंसान के इस तरह झूमने का मतलब क्या है? क्या मार-पीट के अलावा इनका कोई और इलाज नहीं है? आखिर तांत्रिक ऐसा क्या मंत्र फूंकते हैं कि इंसान चंद पलों में ही भला-चंगा हो जाता है? यह सब कुछ एक अंधविश्वास है, इतना तो टीम समझ ही रही है.

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इसकी कुछ तस्वीरें तो टीम ने उस मेले में देखीं. मसलन वो ओझा, जिसके हाथों में शराब की बोतल थी. वो चांदी के सिक्के, जिनके लालच में लोगों को प्रेत-बाधा का शिकार बताया जाता है. कुछ बहके हुए लोग, जो खुद को शिकार समझकर ढोल की थाप पर अचानक थिरकने लग जाते हैं. अपने शक को यकीन में बदलने के लिए टीम ने तलाश किया कुछ ऐसे जानकारों की जो इस खेल के पीछे का खेल अच्छी तरह जानते हैं.

ऐसे ही एक शख्स हैं बलिया शहर के सीएमओ डॉ. पीके सिंह. उन्होंने कहा कि यह एक सामाजिक बुराई है. यहां बहुत सारी बंदिशें हैं. शहरों में तो कहीं भूत नहीं होता है. यहां सिर्फ और सिर्फ एजुकेशन की कमी है. कई रिसर्च मानती हैं कि देश के 78 फीसदी लोग किसी न किसी मानसिक बीमारी का शिकार हैं. जिनमें से एक बड़ी गिनती उन लोगों की है, जो तांत्रिकों पर यकीन करते हैं और खुद को बीमार नहीं बल्कि शैतानी शक्ति का शिकार समझ बैठते हैं.

विशेषज्ञ बताते हैं कि ये एक सामाजिक परेशानी है. इसमें लोग जो बात घर में नहीं कह पाते, वो भूत के बहाने कहते हैं. मतलब यह कि प्रेत-बाधा सिर्फ एक पाखंड है. ये एक ऐसा अंधविश्वास है, जिसका शिकार केवल मासूम लोग होते हैं. इसके साथ ही हमारी तफ्तीश इसी नतीजे पर खत्म हुई कि न शैतानी शक्तियां होती हैं. न इंसान उनके वश में आ सकता है. ये केवल इन ओझाओं के पाखंड का मात्र है. यही इस कहानी की हक़ीक़त है और सब कुछ सिर्फ एक फ़साना.

रिपोर्टर- सैयद सुहैल
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कैमरा- नाजिम अंसारी

एडिटर- हरमीत सिंह/मनदीप सिंह

प्रोड्यूसर- आशीष पांडेय/जितेश पांडेय
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