आखिर कैसे कोई शैतानी ताकत का शिकार हो जाता है?

मनियार में ओझा प्रेत-बाधा दूर करने के नाम पर महिला को पीटना शुरू कर देता है. महिला चीखती रही और भूत भगाने के नाम पर ओझा सारी हदें पार करता रहा...

News18Hindi
Updated: August 18, 2018, 8:02 AM IST
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Updated: August 18, 2018, 8:02 AM IST
उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के मनियार गांव में जो नजारा दिखाई दे रहा है. क्या यह सब कुछ सिर्फ प्रेत-बाधा का नतीजा है. क्या कोई शैतानी शक्ति वाकई इंसान के शरीर पर कब्जा कर सकती है. इस रहस्य को तलाशने के लिए जरूरी था इस पूरे खेल को समझना. टीम ने अपनी तफ्तीश शुरू की शांति देवी से. लोगों का दावा है कि शांति देवी किसी शैतानी ताकत का शिकार हैं.

तांत्रिक के साथ बैठी शांति अब तक खामोश है. ओझा के बोलते ही वो एक नए रूप में आ गई. ओझा सवाल पूछता रहा और शांति जवाब देती रही. लोगों का दावा है कि वो शांति नहीं, बल्कि उसके भीतर मौजूद शैतानी ताकत जवाब दे रही है. टीम के सदस्यों ने जब पंडित से पूछा कि ये क्या है और कैसे हुआ. तब उन्होंने बताया कि शांति के ऊपर प्रेत सवार है. उन्होंने इसे कंट्रोल करके अपने वश में रख लिया है.

शरीर पर लेग चोटों के कारण शांति दर्द से कराहती रही है और वहां मौजूद ओझा उन शक्तियों से बातचीत का दावा करते रहे. इसके बाद ओझा ने शांति को चावल और लौंग के कुछ दाने दिए, जिसे खाते ही शांति की हालत और भयानक हो गई. ओझा ने प्रेत-बाधा दूर करने के नाम पर शांति को पीटना शुरू कर दिया. पिटाई के कारण महिला चीखती रही और भूत भगाने के नाम पर ओझा ने सारी हदें पार करता रहा. लोग तमाशा देखते रहे और ओझा वही करता रहा, जो यहां रोज होता है.

तांत्रिक खड़े होकर कुछ मंत्र बोल रहा है. टीम के सभी सदस्य यही सोच रहे थे कि आखिर ये सब कुछ क्यों हो रहा है. क्या लोगों के इलाज का सिर्फ यही तरीका है. अगर नहीं, तो ये खेल अब तक क्यों नहीं थम रहा है. इस मंजर को देखने के बाद टीम आगे बढ़ी तो मुलाकात एक नौजवान से हुई, जो कुछ अजीबो-गरीब हरकतें कर रहा है.

मौजूद लोग बता रहे हैं कि यह लड़का बुरी हवाओं का शिकार है और इस मेले में मुक्ति की तलाश में आया है. ये लड़का जितना अजीब है, उससे कहीं ज्यादा अजीब वो ओझा है, जो इसके इलाज का दावा कर रहा है. टीम को बताया गया प्रेत-बाधा दूर होने के बाद लोगों को यहां जमीन खरीदनी पड़ती है यानी ये छोटे-छोटे चबूतरे. जिसमें शैतानी ताकतों को हमेशा के लिए बसा दिया जाता है.

प्रेत-बाधा से मुक्ति के लिए चांदी के 11 सिक्कों के साथ हर वो सामान चढ़ाया जाता है, जिसकी मांग उस शैतानी ताकत ने रखी होती है. यानी भोले-भाले लोग हजारों रुपए देकर एक ऐसी शक्ति से निजात पाने आते हैं, जिसके वज़ूद का कोई प्रमाण नहीं मिलता. जिसके वजूद की विज्ञान के नज़र में कोई कीमत नहीं है. देखते देखते शाम ढल गई लेकिन कहानी अभी खत्म नहीं हुई.

लोगों ने बताया कि प्रेत-बाधा से मुक्ति का आखिर पड़ाव नवका बाबा के मंदिर में आरती के बाद ही पूरा होगा. इस विदाई के साथ यह दावा भी हुआ कि सुबह से दरबार में अर्जी देने वाला हर शख्स प्रेत-बाधा से मुक्त हो चुका है. रोज की तरह मेले में आज का सिलसिला थम गया लेकिन टीम की तफ्तीश तो अब शुरु हो रही है. पूरी रात इस मेले में बिताने के बाद इंतजार सुबह का था और तलाश कुछ ऐसे लोगों की, जो विश्वास और अंधविश्वास के इस फर्क को बरसों से जानते हैं. जिनके पास हर सवाल का जवाब है, जो आज पूरे देश को इस खेल के पीछे का असली सच बता सकते हैं.
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