सोने की लालच में लोगों ने बावड़ी को मलबे में बदल दिया

शाहाबाद किसी ज़माने में कोटा सल्तनत की राजधानी हुआ करता था. लोगों ने बताया था कि शाहाबाद किले में खज़ाने का अकूत भंडार था...

News18Hindi
Updated: August 26, 2018, 7:35 AM IST
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Updated: August 26, 2018, 7:35 AM IST
पारसमणी से जुड़ी तिमनगढ़ की कहानी जहां से खत्म होती है, शाहाबाद की कहानी वहीं से शुरू होती है. शाहाबाद के किले के बारे में बहुत से लोग कुछ नहीं जानते, लेकिन जो जानते हैं, वो पूरे यक़ीन से कहते हैं कि इस किले में दुनिया का सबसे बड़ा खज़ाना छिपा है. सदियों बाद भी इलाके के लोग दावा करते हैं कि यहां की मिट्टी सोना उगलती है.

किले के आसपास आज भी लोगों को सोने के गहने या सिक्के मिल जाते हैं. कुछ वक्त भी टीम ने इस किले की पड़ताल की थी. कुछ आधुनिक मशीनों के जरिए पड़ताल करने के बाद टीम के भी होश उड़ गए. शाहाबाद का किला राजपूतों की रियासत और मुगलों की विरासत का अद्भुत मेल है.

शाहाबाद किसी ज़माने में कोटा सल्तनत की राजधानी हुआ करता था. लोगों ने बताया था कि शाहाबाद किले में खज़ाने का अकूत भंडार था. शायद वही सोना, जिसे पारस पत्थर के करिश्मे से तैयार किया गया था. किले की पड़ताल के लिए न्यूज 18 की टीम भी शाहाबाद पहुंची, तो पता चला कि यहां किसी को भी राह चलते सोना मिल जाता है. इस तरह का दावा करने वाले यहां एक नहीं, तमाम लोग मौजूद थे.

टीम को इन दावों पर जितना शक़ था, लोगों को उतना ही यक़ीन था. टीम को बताया गया कि वो किला पुरात्तव विभाग नहीं, बल्कि वन विभाग के जिम्मे है. इसलिए आसपास के लोग वहां बेरोकटोक जाते हैं. खजाना पाने की लालच में आए दिन अलग-अलग जगहों पर खुदाई करते रहते हैं. लोगों का कहना है कि इनमें कुछ नसीबवाले भी होते हैं, जिन्हें उस किले में बहुत कुछ मिला लेकिन जिन्हें मिला वो न अपना मुंह खोलना चाहते हैं और न ही चेहरा दिखाना चाहते हैं.

शाहाबाद किले में दाखिल होने से पहले टीम के सदस्य कुछ जानकारों से मिले. उन लोगों ने बताया कि खज़ाने मिलने की सबसे ज्यादा गुंजाइश किले की बावड़ी में है. जिसमें पांच गुप्त तहखाने हैं और हर तहखाने पर एक बड़ा सा ताला लगा है. सब कुछ पानी के भीतर है, इसलिए न वहां जाना आसान है और न खज़ाने को हासिल कर पाना.

हालांकि पिछले कई बरसों में खज़ाने के लालची लोगों ने उस बावड़ी को अच्छा खासा नुकसान पहुंचाया है. खजाने का सच जानने के लिए टीम कुछ स्थानीय लोगों को साथ लेकर किले में दाखिल हुई. नवल बावड़ी के ठीक बाहर एक सरकारी बोर्ड लगा था, जिसमें साफ लिखा था कि कुछ वक्त पहले एक रहस्यमय विस्फोट की वजह से बावड़ी के कई रास्ते बंद हो चुके हैं.

मतलब कि कुछ लोगों ने खज़ाने के लिए बावड़ी के तहखानों में विस्फोट तक किया ताकि तहख़ानों में लगा ताला टूट जाए. टूटे फूटे रास्तों के सहारे टीम बावड़ी में जाने के लिए नीचे उतरने लगी. टीम के सदस्यों ने बहुत सी बावड़ियां देखी थीं लेकिन इतनी बड़ी बावड़ी आज तक किसी भी सदस्य ने नहीं देखी थी.
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यहां 365 सीढ़ियां हैं, जिन्हें बनाने का मतलब ये है कि पानी बहुत ज्यादा स्टोर रहे. लेकिन लोगों का मानना है कि यहीं पर दफ्न है वो खज़ाना, जिसे आजतक कोई नहीं खोज पाया. नीचे पहुंचने पर दिखाई दिया कि पूरी बावड़ी मलबे के ढेर में तब्दील हो चुकी थी. शायद उन लोगों की व़ज़ह से जिन्होंने खज़ाने को पाने की नाकाम कोशिश की थी. बड़े-बड़े पत्थर उन सीढ़ियों के अवशेष हैं, जिनके सहारे बावड़ी में नीचे तक उतरा जाता था. टीम के सदस्यों ने पूरी बावड़ी को छान मारा, लेकिन सोना मिलने की बात कोरी अफवाह साबित हुई.

रिपोर्टर- सैयद सुहैल
कैमरा- नाजिम अंसारी
प्रोड्यूसर- आशीष पांडेय/जितेश पांडेय
एडिटर- हरमीत सिंह/मनदीप सिंह
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