'काले जादू से पैसे दोगुने नहीं होते', यह जानने के लिए वो ज़िंदा ही नहीं बचा

तंत्र मंत्र और काले जादू के झांसे में फंसाकर एक युवक की हत्या कर दी गई. मध्य प्रदेश के बड़वानी ज़िले में हत्यारों ने इस युवक के अंधविश्वास का फायदा उठाया और उसे लालच देकर मौत के घाट उतार दिया.

Bhavesh Saxena | News18Hindi
Updated: August 23, 2018, 8:22 PM IST
'काले जादू से पैसे दोगुने नहीं होते', यह जानने के लिए वो ज़िंदा ही नहीं बचा
सांकेतिक चित्र
Bhavesh Saxena
Bhavesh Saxena | News18Hindi
Updated: August 23, 2018, 8:22 PM IST
'तंत्र मंत्र में बड़ी शक्ति होती है, काले जादू से सब कुछ मुमकिन है. किसी की जान ली जा सकती है और किसी को खुशहाल भी किया जा सकता है..' बार-बार यही सब सुनने के बाद नारायण को भरोसा हो गया था कि काला जादू उसकी ज़िंदगी में नई रोशनी भरने का रास्ता बनेगा. वो तो उस रात जादू से दौलत कमाने गया था लेकिन काला हो या कैसा भी, जादू से न ज़िंदगी बदलती है और न दौलत मिलती है, यह समझने के लिए नारायण ज़िंदा ही नहीं बचा.

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ये कहानी है मध्य प्रदेश के बड़वानी ज़िले की जहां एक खुशहाल लड़का नारायण अंधविश्वास में फंसता ही चला गया. नारायण अच्छी खासी दुकान चलाता था और ज़िले के अच्छे कारोबारियों में उसका नाम था. 28 साल के नारायण का भरा पूरा परिवार था और वह सबकी खुशहाली के लिए अपनी हर ज़िम्मेदारी निभाने के लिए तैयार रहता था. अब छोटी मोटी तकलीफें तो हर घर में रहती ही हैं लेकिन नारायण ने इन बातों को ज़्यादा सीरियसली ले लिया था.

दूसरी बात यह थी कि नारायण काफी सालों से अंबापाड़ा के रहने वाले एक तांत्रिक भक्तरिया का तकरीबन भक्त बन चुका था. परिवार में किसी की सेहत खराब हो जाए, धंधे में कुछ मामूली सी भी गड़बड़ हो जाए या परिवार में किसी को कोई भी काम शुरू करना हो, हर बात में नारायण इस बाबा की सलाह लेता और उस बाबा की बताई हुई पूजा करता. यह बाबा काले जादू का मास्टर होने का दावा करता था और काले जादू से हर तकलीफ का हल होने का भी.

नारायण की संगत भी ऐसे लोगों की थी जो या तो इस बाबा के भक्त थे या फिर काले जादू में विश्वास रखा करते थे. नारायण अपने दोस्तों और संगी साथियों के बीच अक्सर इस बारे में बातचीत किया करता था. कुछ लोग थे जो नारायण की इन बातों को बकवास कहते थे लेकिन नारायण का विश्वास डिगा नहीं सके थे क्योंकि उसके पास सबूत के तौर पर वह खुद था. वह ऐसे लोगों से कहता कि बाबा के कहने पर उसने पूजा की तो उसे फायदा हुआ.

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भक्तरिया का बेटा था संजय जो अपने बाप की तरह काला जादू जानने का दावा करता था और अपने दोस्तों की मदद से अपना अलग धंधा जमाने की कोशिश कर रहा था. कई सालों में नारायण कई बार भक्तरिया के यहां जा चुका था इसलिए वह और संजय एक दूसरे को जानते थे. संजय के साथ उसके दो दोस्त दिनेश और प्रकाश अक्सर रहा करते थे. संजय और उसके दोनों दोस्तों की गाढ़ी संगत का राज़ यह भी था कि ये सब नशे के शौकीन थे.
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भक्तरिया के पास नारायण जब भी आता तो संजय उसे बातों बातों में यह ज़रूर कहता कि जब बड़े फायदे की इच्छा हो तो वह उससे आकर मिले. संजय काले जादू के अपने हुनर को हर तरह से ज़ाहिर करता था और चूंकि वह नारायण का हमउम्र था इसलिए नारायण भी उससे कुछ बातें कर लेता था. दिनेश और प्रकाश भी नारायण और नारायण की तरह आने वाले हर जजमान के सामने संजय की तारीफों के पुल बांधते और मनगढ़ंत कहानियां सुनाकर यह जताने की कोशिश करते कि संजय के कारण किसी को बड़ा फायदा हुआ.

अपने परिवार की खुशहाली की कामना लिये नारायण इसी साल मई के महीने में जब भक्तरिया के पास गया तो भक्तरिया ने उसके परिवार के लिए पूजा पाठ किया. इसके बाद जब नारायण वहां से जा रहा था तभी संजय उससे मिला और बातचीत करने लगा -

संजय : नारायण बाबू, सुना है आजकल धंधा मंदा चल रहा है तुम्हारा?
नारायण : ठीक ही है, बाबा का आशीर्वाद है तो सब ठीक हो जाएगा.
संजय : हां हो तो जाएगा लेकिन भाई जादू में बड़ी ताकत है. हम ऐसे तंत्र मंत्र भी जानते हैं जिससे रकम दोगुनी तक हो सकती है.
नारायण : अच्छा! मतलब एक लाख के दो लाख हो सकते हैं?
संजय : और काले जादू में इतनी ताकत है कि इसके लिए किसी बैंक की तरह महीनों या सालों इंतज़ार करने की ज़रूरत नहीं है. रकम रखो, तंत्र मंत्र करो और कुछ ही देर में यानी एक घंटे के अंदर रकम दोगुनी. मन हो तो बताना. टीकमगढ़ के गुप्ता जी आए थे हफ्ते भर पहले तो बड़े खुश हुए. हमने तो काफी मना किया लेकिन बोले कि लाखों को फायदा हुआ है तो इक्कीस हज़ार की दक्षिणा देकर गए.

संजय की बातों में एक आकर्षण था और नारायण के मन में एक लालच पैदा हो चुका था. फिर भी, नारायण ने इस बारे में भक्तरिया से बात करना ठीक समझा. एक दो दिन बाद फिर किसी पूजा के सिलसिले में जब नारायण वहां पहुंचा तो उसने भक्तरिया से बातों बातों में पूछा कि क्या तंत्र मंत्र से ऐसा मुमकिन है कि कोई रकम कुछ ही मिनटों में दोगुनी हो जाए? तो भक्तरिया ने कहा -

अगर साधक की साधना पक्की है तो सब कुछ हो सकता है बेटा. रकम दोगुनी तो क्या चार गुनी भी हो सकती है लेकिन तंत्र मंत्र का विधान और तपस्या पक्की होना चाहिए. काले जादू का लोग मज़ाक उड़ाते हैं लेकिन यह वो विद्या है जो किसी की जान भी ले सकती है और किसी को जीवन भी दे सकती है. इससे सब कुछ संभव है. लेकिन काले जादू के ढोंगियों से बचना चाहिए.


जब भक्तरिया से नारायण ने यह पूछा कि क्या वह रकम दोगुनी करने वाला तंत्र मंत्र करता है तो भक्तरिया ने उलझी हुई बातें करते हुए कभी कहा कि तंत्र मंत्र में यह सब करना ठीक नहीं है. विद्या का गलत इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. फिर उसने यह भी कहा कि उसने अब तक यह किया नहीं है लेकिन कभी सही मौका लगा तो कर भी सकता है. भक्तरिया ने इस बातचीत में एक बार यह भी कहा कि यह काम बहुत कठिन है लेकिन किया जा सकता है.

पूरी बातचीत के बाद नारायण की समझ में यह आया कि ऐसा हो सकता है लेकिन बाबा ऐसा करेगा नहीं. उस दिन फिर संजय उससे मिला तो नारायण ने रुपये दोगुने करने की बात छेड़ी. संजय ने उसे फिर लालच दिया और इस बार बात यहां तक पहुंच गई कि नारायण तैयार हो गया -

संजय : आप चिंता न करो नारायण बाबू. बस विधि विधान से एक पूजा करने की देर है और फिर आपकी चांदी.
नारायण : तो समय और जगह बताएं संजय भाई.
संजय : जगह.. अपना ही गांव है सजवानी, वहां मन्ना काग के पास एक कुआं है. वहीं करेंगे पूजा क्योंकि यह पूजा पानी के पास ही होती है. और समय.. पंचांग में तिथि देखकर बताता हूं. 23 मई को अच्छा मुहूर्त है. बुध की रात कुएं पर आ जाना.
नारायण : ठीक है संजय भाई. कितने पैसे ले आऊं? मेरा मतलब..
संजय : देखो संजय बाबू, एक बात समझ लो कि एक बार यह पूजा हो गई तो फिर अगले कुछ साल बाद ही ऐसा योग बनता है यानी ऐसा नहीं है कि आदमी बार-बार पैसे दोगुने करता जाए. एक बार हो गया तो फिर सालों की छुट्टी. इसलिए जितने ज़्यादा चाहिए हों, उतने ले आना. फिर इक्कीस हज़ार तो दक्षिणा दे गए थे गुप्ता जी. लाखों की बात होती है तो तंत्र मंत्र करने में भी तसल्ली होती है कि चलो किसी का भला हुआ.

संजय की बातों से खुश होकर नारायण जाने लगा तो संजय ने यह भी कह दिया कि पूजा तक इस बात को गुप्त रखना होता है. किसी को पता नहीं चलना चाहिए नहीं तो मनचाहा फल नहीं मिलता. नारायण ने हामी भर दी और समय पर पहुंचने की बात कही. 23 मई को वह दुकान पर नारायण ने अपने पिता को बैठने को कहा और कुछ देर में लौटने की बात कहकर चला गया.

मन्ना काग के कुएं पर पहुंचने के बाद नारायण ने देखा कि संजय अपने उन्हीं दोनों दोस्तों और एकाध और आदमी के साथ वहां मौजूद है. 'समय के बड़े पक्के हो नारायण बाबू', यह कहकर संजय ने नारायण से बैठने को कहा और अपने लोगों को पूजा के लिए इंतज़ाम करने को कहा. कुएं के पास ही पूजा की तैयारी शुरू हुई. हवनकुंड बनाया गया, उसमें आग का इंतज़ाम किया गया और बाकी पूजा सामग्री भी वहां लाई गई.

इसके बाद संजय ने पूरा माहौल बनाकर तंत्र मंत्र का जाप करना शुरू किया और नारायण को आंखें बंद कर ध्यान लगाने को कह दिया. नारायण की रकम पूजा की जगह के पास रखवा ली. संजय ज़ोर ज़ोर से जाप कर रहा था और नारायण आंखें बंद किए बैठा मन ही मन खुश हो रहा था. तभी, पीछे से एक रस्सी जैसी चीज़ नारायण के गले में पड़ी और संजय के साथियों ने नारायण का गला घोंटना शुरू कर दिया. संजय ज़ोर से मंत्र जाप करते हुए नारायण के पैर पकड़े रहा और कुछ ही देर बाद नारायण लाश बन चुका था.

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इसके बाद सबने मिलकर पहले नारायण की लाश को एक बड़ी सी प्लास्टिक में लपेटा. दूसरी तरफ, संजय के कुछ लोगों ने उस जगह की सफाई की ताकि किसी को पता न चले कि यहां किसी किस्म का पूजा पाठ किया गया था. नारायण की लाश को उसी कुएं में फेंककर ये सभी लोग नारायण के लाए हुए ढाई लाख रुपये लेकर वहां से चंपत हो गए.

अगले दिन यानी 24 मई को नारायण की लाश कुएं से बरामद हुई. पुलिस को करीब पांच दिन लगे, नारायण के फोन के कॉल डिटेल के ज़रिये संजय, दिनेश और प्रकाश तक पहुंचने में. 29 मई को इन तीनों को पुलिस ने गिरफ्त में ले लिया और पूछताछ में इन्होंने सब कुछ उगल दिया कि कैस काले जादू के नाम पर नारायण की हत्या की गई.

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