#MotivationalStory: आप गुस्से से किसी और का नहीं बल्कि अपना दिल दुखाते हैं

बेहतर है कि किसी पर गुस्सा करने की बजाय आप उसकी भूल को भुला दें. इससे आप उस पर कोई एहसान नहीं कर रहे हैं, आप सिर्फ अपनी शांति की ओर एक कदम बढ़ा रहे हैं.

News18Hindi
Updated: August 27, 2018, 7:46 AM IST
#MotivationalStory: आप गुस्से से किसी और का नहीं बल्कि अपना दिल दुखाते हैं
प्रेरक कथाएं
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Updated: August 27, 2018, 7:46 AM IST
गुस्सा आना सभी को आम बात ही लगती है. आपको कोई बात बुरी लगी या किसी का बर्ताव पसंद नहीं आया तो गुस्सा आ जाता है. आप उस वाकये को लेकर बैठ जाते हैं. सुबह से लेकर रात तक वही बात आपके दिमाग में घूमती रहती है. आप उस व्यक्ति के बारे में दूसरों से बात करते हैं. यहां तक कि अगर कोई नहीं मिलता तो आप खुद में ही बड़बड़ाते रहते हैं.


इस तरीके से उस व्यक्ति को कोई हानि हो या न हो, आप जरूर परेशान होते रहते हैं. इस बात की पुष्टि कई किस्से-कहानियों में मिलती है. गौतम बुद्ध के प्रचलित प्रसंगों में से एक प्रसंग ऐसा है, जिसमें एक व्यक्ति ने बुद्ध का बहुत अपमान किया था. जानिए वही प्रसंग...



एक बार महात्मा बुद्ध एक गांव में उपदेश दे रहे थे कि क्रोध एक प्रकार की अग्नि है. क्रोध करना ऐसा है कि आप विष पिएं और उम्मीद करें कि सामने वाला मर जाए. क्रोध में व्यक्ति दूसरों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करता है, लेकिन इस आवेश में व्यक्ति खुद दूसरों से ज्यादा परेशान होता है. गौतम बुद्ध की ये बातें सभा में बैठा एक क्रोधी व्‍यक्ति भी सुन रहा था. उसे क्रोध के बारे में कही गई बुद्ध की बातें बिल्कुल भी अच्छी नहीं लगीं.


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शांत बुद्ध को देखकर वह और क्रोधित हो उठा. उसने उनके पास आकर उनके मुंह पर थूक दिया.


बुद्ध ने अपना चेहरा पोंछा और उससे पूछा- तुम्हें और कुछ कहना है?


वह व्यक्ति बिना कुछ कहे वहां से चला गया.


बुद्ध के शिष्य इस बात पर बड़े क्रोधित हुए. कहा, “ क्या आपको गुस्सा नहीं आया. उसकी हिम्मत कैसे हुई इस तरह का व्यवहार करने की. ”


बुद्ध ने कहा, “वो व्यक्ति बहुत परेशान था. भाषा असमर्थ थी, इसमें उसका कोई दोष नहीं.”


सुबह तक उस व्यक्ति का क्रोध भी शांत हो चुका था और उसे पश्चाताप हो रहा था. वह बुद्ध को खोजते हुए उस गांव में गया, जहां वे प्रवचन दे रहे थे. वह व्यक्ति बुद्ध के चरणों में गिर पड़ा और रोने लगा.


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उसने कहा, आप मुझे भूल गए! मैं वही दुष्ट इंसान हूं, जिसने आप पर कल थूका था, आपका अपमान किया था.


बुद्ध ने हंसकर कहा- कल की बातें तो मैं कल ही छोड़ आया हूं. मैं क्रोध करता तो उससे तुम्हें कोई फर्क नहीं पड़ता, सिर्फ मेरा दिल दुखता. हर बुरी बात या घटना को याद रखा जाएगा तो जीवन और भविष्य दोनों ही ठहर जाएंगे और परेशानियां बढ़ेंगी.


गुस्सा करना किसी बात का हल नहीं है. इससे सिर्फ मन की शांति भंग होती है. बेहतर है कि किसी पर गुस्सा करने की बजाय आप उसकी भूल को भूला दें. इससे आप उस पर कोई एहसान नहीं कर रहे हैं, आप सिर्फ अपनी शांति की ओर एक कदम बढ़ा रहे हैं.


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