#काम की बात : क्‍या मास्‍टरबेट करने के कारण स्‍मृति क्षीण हो जाती है

जहां तक याददाश्‍त चले जाने का सवाल है तो यकीन करिए कि अगर आप स्‍वस्‍थ जीवन जिएंगे, खान-पान का ध्‍यान रखेंगे, पौष्टिक आहार लेंगे तो आपका दिमाग तेज होगा और आपका हर बात याद रहेगी, मास्‍टरबेट करने के बावजूद

Dr Paras ShahSexologist and Fertility Specialist | News18Hindi
Updated: August 27, 2018, 4:44 PM IST
#काम की बात : क्‍या मास्‍टरबेट करने के कारण स्‍मृति क्षीण हो जाती है
सेक्‍स सलाह
Dr Paras Shah
Dr Paras ShahSexologist and Fertility Specialist | News18Hindi
Updated: August 27, 2018, 4:44 PM IST
प्रश्‍न : मेरी उम्र 25 साल है. मैं पिछले कई सालों से नियमित रूप से हस्‍तमैथुन कर रहा हूं. हाल ही में मैंने एक मैगजीन में पढ़ा कि हस्‍तमैथुन करने से याददाश्‍त कमजोर हो जाती है. क्‍या ये सच है? अगर मैं ये करता रहूंगा तो क्‍या मेरी स्‍मृति चली जाएगी?

उत्‍तर : बिलकुल नहीं. आप निश्चिंत रहें, आपकी याददाश्‍त बिलकुल नहीं जाएगी. यह कोरी बकवास के सिवा कुछ नहीं है. मास्‍टरबेशन या हस्तमैथुन कोई बीमारी नहीं है. यह बुरी बात भी नहीं है. यह बहुत प्राकृतिक क्रिया है. लेकिन हमारे यहां सेक्स एजूकेशन को ज्‍यादा महत्‍व नहीं दिया जाता. स्कूल और कॉलेज में कभी इस बारे में किशोर-किशोरियों को कोई शिक्षा नहीं दी जाती. इसलिए हमें सही-गलत का पता नहीं चलता है. ऊपर से तथाकथित धर्मगुरु अपने प्रवचनों और पुस्‍तकों में कहते हैं कि एक बूंद वीर्य का मतलब है 100 बूंद खून और एक बूंद खून का मतलब है बहुत सारा पौष्टिक आहार.

हमारे धर्मगुरु अपनी किताबों में वीर्य को पुरुष का तेज बताते हैं. अब इस तरह की सांस्‍कृतिक परवरिश के बाद और ऐसी किताबों को पढ़ने और सुनने के बाद जब भी कोई हस्‍तमैथुन करता है तो उसके मन में एक ही ख्‍याल आता है कि मैंने अपनी सारी शक्ति बर्बाद कर दी. उसके मन में अपराध बोध जन्‍म लेता है. इस तरह की ऊल-जुलूल बातें, जो पत्रिकाओं में छपती रहती हैं, उनका भी कोई अर्थ नहीं है. कहीं कुछ भी पढ़कर उसे सच मान लेना एक बुद्धिमान व्‍यक्ति का लक्षण नहीं है. आपको सबसे पहले उस मैगजीन की ऑथेंटिसिटी जांचनी चाहिए. सही स्रोतों से ही जानकारी इकट्ठा करें.

समाज में बड़े पैमाने पर होने वाले इस तरह के कुप्रचार की एक वजह और है. सेक्‍स हमारे समाज में एक प्रतिबंधित विषय है. न तो उसके बारे में सही शिक्षा दी जाती है, न बात की जाती है और न ही उससे जुड़ी शंकाओं और सवालों का कहीं से हल मिलता है. ऐसे में मन में अपरोध बोध होना और नकारात्‍मक किस्‍म के विचार आना बहुत स्‍वाभाविक है.

जबकि इसके पीछे की वैज्ञानिक हकीकत ये है कि वीर्य हमारे शरीर में चौबीसों घंटे बनता रहता है. आप जाग रहे हों, सो रहे हो या फिर इस वक्‍त, जब आप इस आर्टिकल को पढ़ रहे हैं, उस समय भी आपके अंडकोष में वीर्य बनने की प्रक्रिया चालू है. अगर आप हस्तमैथुन नहीं करेंगे या फिर शारीरिक संबंध नहीं बनाएंगे तो वीर्य अपने आप रात को नींद में निकल जाएगा. यह एक बहुत सामान्‍य प्रक्रिया है. युवावस्‍था की दहलीज पर पांच रखते ही शरीर में अपने आप हॉर्मोनल बदलाव होते हैं. इसी बदलाव का नतीजा है कि लड़के और लड़कियां विपरीत लिंग की तरफ आकर्षित होते हैं. दैहिक बदलावों को लेकर जिज्ञासा होती है. शरीर में आ रहे बदलावों की अपनी प्राकृतिक वजह है. इसे वैज्ञानिक ढंग से समझने की जरूरत है, न कि पोंगापंथी किताबों पर विश्‍वास करके अपने मन में अपराध बोध पालने की. मास्‍टरबेट या हस्‍तमैथुन बहुत सहज, प्राकृतिक क्रिया है. इसलिए इसे लेकर चिंतित या परेशान होने की जरूरत नहीं है. मन में किसी प्रकार का अपराध बोध पालने की भी जरूरत नहीं है. यह कोई बीमारी नहीं है, इसलिए इसका इलाज भी नहीं है.

जहां तक याददाश्‍त चले जाने का सवाल है तो यकीन करिए कि अगर आप स्‍वस्‍थ जीवन जिएंगे, खान-पान का ध्‍यान रखेंगे, पौष्टिक आहार लेंगे तो आपका दिमाग तेज होगा और आपका हर बात याद रहेगी.

(डॉ. पारस शाह सानिध्‍य मल्‍टी स्‍पेशिएलिटी हॉस्पिटल, अहमदाबाद, गुजरात में चीफ कंसल्‍टेंट सेक्‍सोलॉजिस्‍ट हैं.) 
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