श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 2018: पूरे विधि विधान से करें जन्माष्टमी व्रत और पूजा, जानें विधि

इस साल श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 3 सितंबर 2018 को पड़ रही है.

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Updated: August 26, 2018, 8:40 AM IST
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 2018: पूरे विधि विधान से करें जन्माष्टमी व्रत और पूजा, जानें विधि
प्रतीकात्मक तस्वीर
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Updated: August 26, 2018, 8:40 AM IST
भाद्रपद अष्टमी को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनाई जाती है. इस दिन को भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का माना जाता है. यह त्योहार हिन्दु त्योहारों में खास है. इस साल श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 3 सितंबर 2018 को पड़ रही है. हालांकि कुछ जगहों पर इसे मनाने की तारीख को लेकर असमंजस है. कुछ जगह कहा जा रहा है कि श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 2 सितंबर को है. लेकिन अभी इसे आने में ठीक एक हफ्ता है, तब तक ये असमंजस दूर हो जाएगा. जानिए जन्माष्टमी की व्रत विधि और कैसे करना है व्रत-पूजन.

जन्माष्टमी व्रत-पूजन विधि
1. उपवास की पूर्व रात्रि को हल्का भोजन करें और ब्रह्मचर्य का पालन करें.
2. उपवास के दिन प्रातःकाल स्नानादि नित्यकर्मों से निवृत्त हो जाएं.

3. पश्चात सूर्य, सोम, यम, काल, संधि, भूत, पवन, दिक्‌पति, भूमि, आकाश, खेचर, अमर और ब्रह्मादि को नमस्कार कर पूर्व या उत्तर मुख बैठें.
4. जल, फल, कुश और गंध लेकर संकल्प करें.
5. अब मध्याह्न के समय काले तिलों के जल से स्नान कर देवकीजी के लिए 'सूतिकागृह' नियत करें.
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6. तत्पश्चात भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति या चित्र स्थापित करें.
7. मूर्ति में बालक श्रीकृष्ण को स्तनपान कराती हुई देवकी हों और लक्ष्मीजी उनके चरण स्पर्श किए हों अथवा ऐसे भाव हो.
8. विधि-विधान से पूजन करें. इस मंत्र से पुष्पांजलि अर्पण करें-

'प्रणमे देव जननी त्वया जातस्तु वामनः.
वसुदेवात तथा कृष्णो नमस्तुभ्यं नमो नमः.
सुपुत्रार्घ्यं प्रदत्तं में गृहाणेमं नमोऽस्तुते.'

अंत में प्रसाद वितरण कर भजन-कीर्तन करते हुए रतजगा करें.

जन्माष्टमी व्रत विधि
* व्रत के दिन मध्याह्न में स्नानकर माता देवकी के लिए सूतिका गृह बनाएं. उसे फूलों से सजाएं. इस सूतिका गृह में बाल गोपाल समेत माता देवकी की मूर्ति स्थापित करें.
* सुयोग्य पंडित की सहायता से विभिन्न मंत्रों द्वारा माता देवकी, बाल गोपाल कृष्ण, नन्दबाबा, यशोदा माता, देवी लक्ष्मी आदि की पूजा करनी चाहिए.
* इसके बाद आधी रात को गुड़ और घी से वसोर्धारा की आहुति देकर षष्ठीदेवी की पूजा करनी चाहिए.
* नवमी के दिन माता भगवती की पूजा कर ब्राह्मणों को दक्षिणा देनी चाहिए और व्रत का पारण करना चाहिए.
* ऐसा करने से मनुष्य के सातों जन्मों का पाप खत्म होता है और वह वैकुण्ठ लोक में स्थान पाता है.

जन्माष्टमी के मौके पर जानिए वृंदावन के ऐसे रहस्य के बारे में, जिसके बारे में आपने सिर्फ सुना होगा. जिस वृंदावन में कान्हा का बचपन बीता वहीं आज भी श्री कृष्ण हर रात आते हैं.

यहां आज भी रास रचाते हैं कान्हा, सुनाई देती हैं आवाजें
भारत में ऐसी कई जगह हैं, जो कई अपने रहस्यों के कारण हमेशा चर्चा का विषय बनी रहती हैं. कान्हा की नगरी मथुरा वृंदावन में निधिवन ऐसी ही एक जगह है जो अपने रहस्य के लिए जानी जाती है.

मान्यता है कि वृंदावन में स्थित निधिवन में आज भी हर रात कृष्ण, गोपियों संग रासलीला करते हैं. इसलिए सुबह से दर्शन के लिए खुला रहने वाला निधि वन शाम को बंद हो जाता है. शाम के समय यहां किसी को रुकने नहीं दिया जाता.

रासलीला देखने वाले हो गए पागल
स्थानीय लोगों और पंडितों का कहना है कि जिसने भी यह रासलीला देखने के की कोशिश की वह या तो वह पागल हो गया या फि‍र उसकी मौत हो गई. इतना ही नहीं निधिवन में दिन में रहने वाले पशु-पक्षी भी शाम होते ही निधिवन को छोड़कर चले जाते हैं.

पेड़ बढ़ते है जमीन की ओर
निधिवन में लगे पेड़ों की डालें ऊपर की तरफ बढ़ने की बजाए जमीन की ओर बढ़ती हैं. फिलहाल यहां रास्ता बनाने के लिए पेड़ों को डंडे के सहारे रोका गया है.

तुलसी के पेड़ बनते है गोपियां
निधिवन में मौजूद तुलसी के पेड़ है गोपियां बनती हैं. यहां तुलसी का हर पेड़ जोड़े में है. इसके पीछे यह मान्यता है कि जब राधा संग कृष्ण वन में रास रचाते हैं तब यही जोड़ेदार पेड़ गोपियां बन जाती हैं. जैसे ही सुबह होती है तो सब फिर तुलसी के पेड़ में बदल जाती हैं.

वन के आसपास मकानों में नहीं हैं खिड़कियां
वन के आसपास बने मकानों में खिड़कियां नहीं हैं. अगर किसी घर में खिड़कियां बना दी गईं तो समय रहते उन्हें हमेशा के लिए बंद कर दिया गया है. कुछ लोगों ने तो अपनी खिड़कियों को ईंटों से बंद भी करा दिया है.

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