7 सितंबर को पड़ेगा भादो का पहला प्रदोष व्रत, दाम्पत्य जीवन के सुख के लिए ऐसे करें पूजा

यह व्रत चंद्र मास के 13 वें दिन (त्रयोदशी) पर रखा जाता है. सावन के बाद भादो के महीने का प्रदोष व्रत 7 सितंबर, शुक्रवार को है.

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Updated: August 29, 2018, 7:16 AM IST
7 सितंबर को पड़ेगा भादो का पहला प्रदोष व्रत, दाम्पत्य जीवन के सुख के लिए ऐसे करें पूजा
प्रतीकात्मक तस्वीर
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Updated: August 29, 2018, 7:16 AM IST
प्रदोष व्रत जीवन के कष्ट दूर करने और भगवान शिव की कृपा सदैव अपने पर बनाए रखने के लिए किया जाता है. इस व्रत में भगवान शिव की उपासना की जाती है. यह व्रत चंद्र मास के 13 वें दिन (त्रयोदशी) पर रखा जाता है. सावन के बाद भादो के महीने का प्रदोष व्रत 7 सितंबर, शुक्रवार को है. इस दिन भगवान शिव के साथ माता पार्वती की पूजा भी की जाती है. माना जाता है ये व्रत रखने पर दो गायों को दान देने के समान पुण्य फल प्राप्त होता है.

प्रदोष व्रत (Pradosh Vrat) महीने में दो बार होता है. इस उपवास में लोहा, तिल, काली उड़द, शकरकंद, मूली, कंबल, जूता और कोयला आदि चीजों का दान करने से शनि से मुक्ति मिलती है. सोमवार को आने वाले प्रदोष व्रत को सोम प्रदोषम या चन्द्र प्रदोषम भी कहा जाता है. मंगलवार को आने वाले प्रदोष व्रत को भौम प्रदोषम कहा जाता है. शनिवार को आने वाले प्रदोष व्रत को शनि प्रदोषम कहा जाता है. जिस वार को यह व्रत पड़ता है उसी अनुसार कथा पढ़ने से फल भी प्राप्‍त होते हैं. हिन्दू कैलेंडर के अनुसार शिव जी की पूजा का सही समय शाम का है, जब मंदिरों में प्रदोषम मंत्र का जाप किया जाता है.

प्रदोष व्रत की विधि
*व्रत के दिन सूरज उदय होने से पहले उठना चाहिये.

*सुबह नहाने के बाद साफ और सफेद रंग के कपड़े पहनें.
*नित्य कार्य कर के मन में भगवान शिव का नाम जपते रहना चाहिये.
*व्रत में किसी भी प्रकार का आहार ना खाएं.
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*घर के मंदिर को साफ पानी या गंगा जल से शुद्ध करें.
*इस मंडप के नीचे 5 अलग-अलग रंगों का प्रयोग कर के रंगोली बनाएं.
*फिर उतर-पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठे और शिव जी की पूजा करें.
*पूजा में 'ऊँ नम: शिवाय' का जाप करें और जल चढ़ाएं.

प्रदोष व्रत को लेकर प्रचलित पौराणिक कथा-
'एक दिन जब चारों और अधर्म की स्थिति होगी, अन्याय और अनाचार का एकाधिकार होगा, मनुष्य में स्वार्थ भाव अधिक होगी. व्यक्ति सत्कर्म करने के स्थान पर नीच कार्यों को अधिक करेगा. उस समय में जो व्यक्ति त्रयोदशी का व्रत रख, शिव आराधना करेगा, उस पर शिव कृपा होगी. इस व्रत को रखने वाला व्यक्ति जन्म- जन्मान्तर के फेरों से निकल कर मोक्ष मार्ग पर आगे बढ़ता है. उसे उतम लोक की प्राप्ति होती है.

अलग-अलग वारों के अनुसार प्रदोष व्रत के लाभ प्राप्त होते हैं-
- रविवार को पड़ने वाले प्रदोष व्रत से आयु वृद्धि तथा अच्छा स्वास्थ्य लाभ प्राप्त किया जा सकता है.
- सोमवार के दिन त्रयोदशी पड़ने पर किया जाने वाला व्रत आरोग्य प्रदान करता है.
- मंगलवार के दिन त्रयोदशी का प्रदोष व्रत करने से रोगों से मुक्ति प्राप्त होती है.
- बुधवार के दिन प्रदोष व्रत से कामनाओं की पूर्ति होती है.
- गुरुवार के दिन प्रदोष व्रत के फल से शत्रुओं का विनाश होता है.
- शुक्रवार के दिन होने वाला प्रदोष व्रत सौभाग्य और दाम्पत्य जीवन की सुख-शान्ति के लिए किया जाता है.
- संतान प्राप्ति की कामना हो तो शनिवार के दिन पड़ने वाला प्रदोष व्रत करना चाहिए.
अपने उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए जब प्रदोष व्रत किए जाते हैं तो व्रत से मिलने वाले फलों में वृद्धि होती है.

प्रदोष व्रत का उद्यापन
- व्रत का उद्यापन त्रयोदशी तिथि पर ही करना चाहिए.
- उद्यापन से एक दिन पूर्व श्री गणेश का पूजन किया जाता है.
- प्रात: जल्दी उठकर मंडप बनाकर, मंडप को वस्त्रों और रंगोली से सजाकर तैयार किया जाता है.
- 'ऊँ उमा सहित शिवाय नम:' मंत्र का एक माला यानी 108 बार जाप करते हुए हवन किया जाता है.
- हवन में आहूति के लिए खीर का प्रयोग किया जाता है.

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