इंडियन इकोनॉमी के लिए बुरी खबर! ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स ने भारत की जीडीपी वृद्धि के अनुमान को घटाया
ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स (Oxford Economics) ने साल 2021 के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि दर (India GDP Growth) के अनुमान को घटाकर 10.2 प्रतिशत कर दिया. पहले परामर्श कंपनी ने भारत की आर्थिक वृद्धि (Economic Growth) की रफ्तार 11.8 फीसदी रहने का अनुमान जताया था.
कोरोना की दूसरी लहर के बीच ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स ने भारत की जीडीपी वृद्धि के अपने अनुमान घटा दिया है.
- news18hindi
- Last Updated: April 26, 2021, 9:56 PM IST
नई दिल्ली. वैश्विक आर्थिक अनुमान जताने और परामर्श देने वाली कंपनी ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स (Oxford Economics) ने भारत के सकल घरेलू उत्पाद वृद्धि (India GDP Growth) के अपने अनुमान को 11.8 फीसदी से घटाकर 10.2 फीसदी कर दिया है. इसके लिए कोविड-19 के बढ़ते मामलों के कारण स्वास्थ्य सेवा (Health Services) पर पड़ रहे भार, वैक्सीन की कीमत (Vaccine Prices) को लेकर हिचक और महामारी की रोकथाम के लिए सरकार की ठोस रणनीति की कमी का हवाला दिया गया है.
परामर्श कंपनी ने इन कारणों को माना अनुमान घटाने की वजह
परामर्श संस्थान ने यह भी कहा कि आने वाले समय में आवाजाही पर पाबंदी लगने की आशंका के बावजूद भारत का स्थानीय स्तर पर लॉकडाउन लगाने का निर्णय, कम कड़े प्रतिबंध और मजबूत उपभोक्ता तथा कारोबारी व्यवहार दूसरी लहर के आर्थिक प्रभाव को कम करेगा. ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स ने कहा कि कोविड-19 संक्रमण के बढ़ते मामलों के कारण स्वास्थ्य सेवा पर पड़ रहे भार, वैक्सीन की कीमत तय करने को लेकर हिचक और महामारी की रोकथाम के लिए केंद्र व राज्य सरकारों की ठोस रणनीति के अभाव को देखते हुए हमने 2021 के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि के अनुमान को घटाकर 10.2 फीसदी करने का निर्णय किया है.
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'लॉकडाउन लगने पर इस अनुमान को भी कर सकते हैं कम'
ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स ने कहा कि दूसरी तिमाही में तिमाही आधार पर जीडीपी वृद्धि में गिरावट दर्ज होगी. उसने यह भी कहा कि अगर बोझ तले दबे अपने स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र के कारण महाराष्ट्र की तरह दूसरे राज्य भी कड़ाई से लॉकडाउन लगाते हैं तो हम अपने वृद्धि के अनुमान को फिर कम करेंगे. ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स ने कहा कि भारत की स्वास्थ्य प्रणाली संक्रमण से ज्यादा प्रभावित राज्यों में बिल्कुल धाराशायी हो गई है. यहां तक कि राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में ऑक्सीजन और कोविड-19 अस्पतालों में बिस्तरों की कमी है. यही नहीं कुछ जरूरी दवाइयों की किल्लत भी महसूस की जा रही है.
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'भारत में मरने वालों की सही संख्या नहीं आ पा रही सामने'
कंपनी ने कहा कि आधिकारिक मृत्यु दर कम है, लेकिन तेजी से लोगों की हो रही मौत की सही तस्वीर सामने नहीं आ रही है. अब हर 10 दिन में मौत की संख्या दोगुनी हो रही है, जबकि पहली लहर में यह औसतन 29 दिनों में हो रही थी. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के सोमवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, देश में पिछले 24 घंटे में कोविड-19 के 3,52,991 नए मामले सामने आने के बाद संक्रमितों की कुल संख्या बढ़कर 1,73,13,163 हो गई है. इनमें इलाज करा रहे मरीजों की संख्या 28 लाख को पार कर गई है. वहीं, संक्रमण से 2,812 लोगों की मौत के बाद मृतकों की संख्या बढ़कर 1,95,123 हो गई है.